रविवार, 24 जुलाई 2016

इतना अविश्वास ठीक नहीं......

लाइट गए आधा घण्टा हो गया था। बिजली दफ्तर फोन लगाया तो पता चला लाइट तो चालू है। लगा, स्कूल का फ़्यूज़ उड़ गया क्या? एकबारगी मन में ये भी आया, कि जिस लड़के को बिल दिया था, उसने शायद बिल जमा न किया हो, सो लाइट काट ही दी गयी हो. उस लड़के को फोन लगाया और डपटा कि समय से बिल क्यों नहीं जमा करते? उसने भी धीरे से कहा कि मैम, बिल तो मैं पन्द्रह तारीख को ही जमा कर आया था. थोड़ी ही देर में वो मुझे रसीद भी दे गया. कुछ महीने पहले इसी लड़के ने बिल जमा किया था, लेकिन कम्प्यूटर में फ़ीड नहीं होने के कारण लाइट कट गयी, और रसीद भी इसने ला के नहीं दी थी, सो इस बार ये खुद भी संशय में था. खैर! मैने ये मान लिया था कि लाइट काट दी गयी है. तभी  ऑफिस के ठीक बगल वाली क्लास के एक बच्चे ने टीचर को बताया- "मैम मैं जब टॉयलेट जा रहा था तो मैंने खट की आवाज़ के साथ मेन स्विच नीचे गिरता देखा है। " मैम ने डाँट लगाई- "अच्छा! अपने आप गिर गया मेन स्विच? ज़रूर तुमने बदमाशी की है। बोलो, तुमने ही गिराया है न मेन स्विच?" बच्चा लगातार मना कर रहा है। 
"नो मैम, मेन स्विच तक मेरा हाथ नहीं पहुंचता. फिर मैं क्यों करूंगा ऐसा? मैने नहीं किया."
लेकिन टीचर थीं, कि अब उसे धमकाने के मूड में आ चुकी थीं. 
"सही-सही बताओ, किसने किया, वरना तुम्हारी ही पिटाई होगी." पूरी क्लास सन्नाटे में थी. सब क्लास के शैतान बच्चों की तरफ़ कनखियों से देख रहे होंगे, ये मैने ऑफ़िस में बैठे-बैठे महसूस किया. तभी उस बच्चे की फ़िर आवाज़ आई- " नो मैम . मैं सही कह रहा हूं."
 बच्चे की रुआंसी आवाज़ सुन के मैं क्लास में पहुंची। उस बच्चे की आंखें बता रही थीं, कि वो सच बोल रहा है. क्न्जम्शन बढने पर मेन स्विच अपने आप गिर के पावर कट करता है, ये भी मुझे मालूम था. सो मैने तत्काल उस बच्चे का बचाव करते हुए  सारे बच्चों को मेन स्विच न छूने की हिदायत दे के मामला शांत किया। 
बच्चे के चेहरे और मेन स्विच की ऊंचाई से ज़ाहिर था कि ये हरक़त उसने नहीं की होगी। सोच रही थी, कि खुद ही इस घेरे में फंस जाने के बाद , आगे से मालूम होने पर भी कोई बात न बताने की क़सम, उस बच्चे ने और शायद क्लास के दूसरे बच्चों ने भी खाई हो.... इतना अविश्वास ठीक नहीं। जाने अनजाने, सच को छुपाये रखने की आदत हम बड़े ही तो नहीं डाल रहे बच्चों में? 

4 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " डिग्री का अटेस्टेशन - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. ऐसा अक्सर होता है इसलिए पूरी तरह से जांच का हो जाना जरूरी है तभी किसी निर्णय पे पहुंचना चाहिए और विशेष कर बच्चों के मामले में ....

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