सोमवार, 1 जून 2009

विद्यार्थियों के साथ मज़ाक...

यह मुद्दा है मध्य प्रदेश के शिक्षा-महाविद्यालयों का। वर्ष २००७ में बरकतुल्ला विश्वविद्यालय ने हमेशा की तरह बी.एड की प्रवेश परीक्षा ली पूरा सत्र बीता और परीक्षाओं का समय आ पहुँचा, लेकिन तभी विश्वविद्यालय ने ६३ शिक्षा-महाविद्यालयों की वैधता पर प्रश्न-चिन्ह लगाते हुए सभी महाविद्यालयों की परीक्षाएं निरस्त कर दीं और इन महाविद्यालयों के संचालक अदालत पहुँच गए वहाँ भी मामले को विचाराधीन कर दिया गया। उल्लेखनीय है, की पूर्व में विश्वविद्यालय ने ही समस्त महाविद्यालयों की सूची संलग्न कर विद्यार्थियों को कॉलेज चुनने की छूट दी थी , बाद में यही कॉलेज अमान्य घोषित कर दिए गए।
अब दो साल बाद कोर्ट ने सभी विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी, लेकिन दो दीं बाद ही परीक्षाओं के आगे बढ़ जाने की ख़बर प्रकाशित हुई। इन दो सालों में इन विद्यार्थियों के पता नहीं कितने मौके छूट गए। बी.एड नहीं होने के कारण निजी विद्यालयों तक में इन्हें काम नहीं मिल सका।
सवाल ये है, की अपना इतना नुक्सान करने के बाद अब ये विद्यार्थी विश्वविद्यालय द्वारा घोषित परीक्षाओं में क्यों शामिल हों? क्यों न इन सब को खामियाजे के रूप में बिना परीक्षा के ही बी.एड की डिग्री दी जाए? क्या विद्यार्थिओं के कारण परीक्षाएं टलीं? कॉलेज अमान्य घोषित किए गए इस में विद्यार्थियों का दोष है? यदि नहीं तो अब दो साल बाद वे क्यों परीक्षा दें? मैं आपकी राय चाहती हूं.

4 टिप्‍पणियां:

  1. university management ko aisa nahi karna chahiya, ye student ke carrier ke liye yakinan bahut nuksaandeh hoga, magar aapne jaisa kaha ki unhe bina pariksha diye hi degree de deni chahiye aisa bhi nahi hona chahiye magar university management ko kuchh na kuchh sochna hoga jis se student ke es nuksaan ki kuchh bharpaai ho sake.... waise aapne achhi jankari di...

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  2. वंदना जी ये तो बहुत ही दुःख की बात है...पता नहीं ये संस्थायें विद्यार्थियों के भविष्य के बारे में सोचते भी हैं या नहीं! सही में दो साल बाद परीक्षाओं का क्या मतलब है......!!!!

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  3. वन्दना जी !
    आपके लेख पर मुझे पड़ोसी नेपाल राष्ट्र की याद आ गयी। वहाँ पर प्रथा यह हैै कि जितनी नौकरी हों उतना ही परीक्षफल घोषित किया जाता है। एक ऐसे ही परीक्षार्थी से मेरी भेंट हुई। उसने बताया कि वह दस वर्ष पूर्व कक्षा दस की परीक्षा दे चुका है। अब उसके तीन बच्चे हैं। शायद अगले वर्ष उसका दसवीं का परीक्षा परिणाम घोषित होगा।
    विश्वविद्यालयों की मनमानी सुनकर मन खिन्न हो जाता है।

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  4. Meraa Bhaarat Mahaan!!!!!!!

    Bahut hi dardnaak baat hai.
    lekin doshi ham hi hain, jo bas dekh ke chup rahate hain!!!!!

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