मंगलवार, 3 मार्च 2009

फिर हमला

एक बार फिर आतंकी हमला सुर्खियों में है। लेकिन हमला इस बार आतंकियों की हिफ़ाज़त करने वाले पाकिस्तान में हुआ है। निशाना फिर विदेशी मेहमान ही बने हैं। शायद अब पाकी हुकूमत अपना रवैया बदले.... शायद अब वह आतंकियों का पक्ष लेना छोडे..... लेकिन अब शायद बहुत देर हो गई है, पाक के लिये। गले तक आतंकियों के जाल में खुद अपनी ही गलती से फंस चुका है वह। अब चाह कर भी आतंक का यह जाल वह काट नहीं पायेगा। फिर??? कैसे रुकेगा यह दमन-चक्र?

4 टिप्‍पणियां:

  1. aapke blog par aaj mai pahli baar aaya hoon,aakar bahut accha laga,aap sahi muddo par baat kar rahi hai,iske liye aapka bahut dhanyawaad,aap kabhi mere blog par aayiye ,aapka swagat hai :-
    हिन्दी साहित्य .....प्रयोग की दृष्टि से

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  2. ब्लौग को सराहने और मेरा उत्साहवर्धन करने के लिये धन्यवाद. उम्मीद है आप सब की ओर से सहयोग प्राप्त होता रहेगा.

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