शनिवार, 28 मार्च 2009

पल

ज़िन्दगी के कुछ ऐसे पल,

जिन्हें हम भोगना चाहते हैं,

लेकिन वे हमसे दूर भागते हैं;

शायद हमसे बचना चाहते हैं ,

हम पकडना चाहते हैं उन्हें,

और वे समा हो जाते हैं,

काल के निर्मम गाल में;

और हम परकटे परिंदे की तरह

देखते रह जाते हैं,

रह जाता है, अंतहीन इंतज़ार-

कि हम से रूठे पल कभी तो वापस आयेंगे.

9 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी प्रस्तुति। पूरी गंभीरता है। कोशिश जारी रखिए। वक्त निकालकर मेरे ब्लॉग पर भी पधारें। शुक्रिया।

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  2. AAPKI SWAGAT AUR SUBHKAMNAE KE LIYE DIL SE DHANYWAD.
    KUCH NAYE VICAR LIKHE HAIN MAIN APNE BLOG PER..AP DEKHE UNHE, ABHI KUCH KACCHA HU LIKHNE MAIN PARANTU EK KOISHS KAR RAHA HU.
    FIR MULAKAT HOGI...IS AASHA KE SAATH.
    SANJAY

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