मंगलवार, 2 दिसंबर 2008

दोस्तों के नाम.........

प्रिय दोस्तो;
इस ब्लोग के ज़रिये हो सकता है मेरे बहुत से पुराने साथी मिल जायें........हो सकता है बहुत से नये साथी बन जायें....वरना मुझ जैसे अदना से इन्सान को ब्लौग की क्या ज़रूरत थी......ज़रूरत महसूस हुई, केवल इसलिये कि मेरे लिखने-लिखाने वाले साथी जो अब पता नहीं कहां हैं, शायद टकरा जायें...... कुछ को तो मैं नियमित प्रकाशित होते देख रही हूं; लेकिन जो नहीं छप रहे, उन्होंने भी लिखना तो बन्द नहीं ही किया होगा....ऐसा विश्वास है मेरा......बस उन्हीं की तलाश में हूँ.........

8 टिप्‍पणियां:

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  2. स्वागत है चिट्ठजगत में, बहुत मित्र मिलेंगे।

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  3. Aur aaj se hm bhi aapke follower ho gaye, aise hi apni achchi achchi rachnaayein laati rahiye...

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  4. namashkar
    mai yaha naya hu . likhta bhi naya hu .shayd apke bare me kisi dost se suna hu .. alok prakash putul ya richa se suna hu lagta hai..jo bhi ho app meri rachnao par kabhi tiapanni karengi ye socha na tha .. achha laga bahut achha laga.. apka bolg dekhkar kuch aur naya karne ko man hua .. karunga . mai photogrepher hu .. kaya yaha photo bhi lagaye ja sakte hai ...

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